गतांक से आगे... (2)
(3) भारतीय संस्कृति में वैचारिक क्षमता की चर्चा में एक और श्लोक है..
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम् पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
गतांक से आगे... (2)
(3) भारतीय संस्कृति में वैचारिक क्षमता की चर्चा में एक और श्लोक है..
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम् पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
गतांक से आगे... व्यष्टि, समष्टि और परमेष्टि अब इतने शुद्ध और श्रेष्ठ विचारों, सूत्रों, श्लोकों की श्रंखला कहाँ से आयी? इसका आधार क्या है? च...