अज्ञानी का उल्टा (विपरीत) ज्ञान
अज्ञानी को सदैव विपरीत आभास होता है। वो जगत को ही सत्य समझता है। इसी को स्थायी समझता है। इसी के कारण उसका सारा एकत्र किया हुआ ज्ञान उल्टा अर्थात विपरीत ज्ञान है, अर्थात अज्ञान है। इसीलिए वो अज्ञानी है।
अज्ञानी का उल्टा (विपरीत) ज्ञान
अज्ञानी को सदैव विपरीत आभास होता है। वो जगत को ही सत्य समझता है। इसी को स्थायी समझता है। इसी के कारण उसका सारा एकत्र किया हुआ ज्ञान उल्टा अर्थात विपरीत ज्ञान है, अर्थात अज्ञान है। इसीलिए वो अज्ञानी है।
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