सनातन अध्यात्म ज्ञान आपके द्वार:
# मैं आत्मन हूँ, साक्षी हूँ। # ये शरीर, वस्तुएं, जगत सब माया है। # माया उस आत्मन पर एकाकार हो प्रतीत हो रही है।
सनातन अध्यात्म ज्ञान आपके द्वार:
# मैं आत्मन हूँ, साक्षी हूँ। # ये शरीर, वस्तुएं, जगत सब माया है। # माया उस आत्मन पर एकाकार हो प्रतीत हो रही है।
गतांक से आगे... व्यष्टि, समष्टि और परमेष्टि अब इतने शुद्ध और श्रेष्ठ विचारों, सूत्रों, श्लोकों की श्रंखला कहाँ से आयी? इसका आधार क्या है? च...