अद्वैत के बाद द्वैत कहाँ?
एक बार जब सिद्ध हो गया कि ये स्थूल दिखने वाला जगत वास्तव में सूक्ष्म ही है, और ये सूक्ष्म अनुभूत होने वाला जगत प्रकाश ही है और ये प्रकाश ही सूक्ष्म और फिर स्थूल बन बैठा है।
अद्वैत के बाद द्वैत कहाँ?
एक बार जब सिद्ध हो गया कि ये स्थूल दिखने वाला जगत वास्तव में सूक्ष्म ही है, और ये सूक्ष्म अनुभूत होने वाला जगत प्रकाश ही है और ये प्रकाश ही सूक्ष्म और फिर स्थूल बन बैठा है।
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