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मंगलवार, 1 फ़रवरी 2022

चैतन्य ही संसार है..

 चैतन्य ही संसार है..

साक्षी है, आत्मन है, चैतन्य है, सर्वत्र है.. तो क्या उसके सिवा कुछ और हो सकता है? अगर दृष्टा है, सर्व समर्थ है, तो आनंद में ही स्वयं में चित्त शक्ति द्वारा दृश्य दृष्टि प्रकट कर लिया... और इस खेल का, इस लीला का, इस कौतुक का आनंद ले रहा है, वो भी बिना कुछ किए।

विश्व शांति का स्त्रोत भारतीय संस्कृति और अध्यात्म भाग 3

गतांक से आगे...  व्यष्टि, समष्टि और परमेष्टि अब इतने शुद्ध और श्रेष्ठ विचारों, सूत्रों, श्लोकों की श्रंखला कहाँ से आयी? इसका आधार क्या है? च...