श्रीमद्भगवतगीता में, श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं..
"जिनका अज्ञान वो सारा, मिटा है आत्म ज्ञान से।
उनका वो सूर्य सा ज्ञान, प्रकाशे है ब्रम्ह रूप को ॥" (५/१६)
श्रीमद्भगवतगीता में, श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं..
"जिनका अज्ञान वो सारा, मिटा है आत्म ज्ञान से।
उनका वो सूर्य सा ज्ञान, प्रकाशे है ब्रम्ह रूप को ॥" (५/१६)
गतांक से आगे... व्यष्टि, समष्टि और परमेष्टि अब इतने शुद्ध और श्रेष्ठ विचारों, सूत्रों, श्लोकों की श्रंखला कहाँ से आयी? इसका आधार क्या है? च...