जब बहु काल करिये सत्संगा । तबहि होहि सब संशय भंगा ।। (उत्तरकांड 60.2)
रामायण के प्रसंग में शिव गरुड़ से कहते हैं कि सभी संशय और प्रश्नों का समाधान तभी हो सकता है जब बहुत काल (समय ) तक सत्संग किया जाय।
गतांक से आगे... व्यष्टि, समष्टि और परमेष्टि अब इतने शुद्ध और श्रेष्ठ विचारों, सूत्रों, श्लोकों की श्रंखला कहाँ से आयी? इसका आधार क्या है? च...